इलैक्ट्रो होम्योेपैथिक की मूल अडतीस दवायें एंव उनके कार्
इलैक्ट्रो होम्योेपैथिक की मूल अडतीस दवायें एंव उनके कार्य
S-1 (स्क्रोोफोलोसोस-1):- यह दवा मेटाबोलिज्मै एंव लिम्फद पर कार्य करने वाली दवा है जो पाचनतंत्र के समस्तै प्रकार के रोगों पर कार्य करती है तथा संजीवनी दवा है यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है कफ प्रकृति के रोगियों पर अच्छात कार्य करती है यदि भोजन से पहले इसकी दस दस बूद मात्र का सेवन किया जाये तो यह पाचन दोषों को दूर करती है एंव शक्तिवर्द्धक एंव वृद्ध व्य क्तियों की मित्र है ।
S-2 (स्क्रोीफोलोसोस-2):- यह दवा विशेषकर मूत्राश्य ,गुर्दा ,अमाश्ये ,छोटी बडी आंत और पित्तै की थैली पर अपना विशेष प्रभाव रखती है तथा यह मिश्रित प्रकृति के रोगियों पर अच्छाे कार्य करती है । मूत्राश्या के रोग मूत्राश्यल की पथरी आदि पर प्रभावी है ।
S-3 (स्क्रोोफोलोसोस-3):- त्वरचा रोग की औषधी है समस्तध प्रकार के त्वेचा रोग जिसमें खुजली त्व चा पर दॉग धब्बे चर्म रोग तथा नामर्दी,सुजाक से उत्पान्न। हुई बीमारीयों में पेचिश ,अमाश्यप ,गर्भाश्यज के रोग प्रोस्टे ट आदि पर
S-5 (स्क्रोिफोलोसोस-5):- यह लीवर की महाऔषधी है तथा लीवर की खराबी से उत्प्न्नय होने वाले समस्त् प्रकार के रोगों पर उपयोगी है , त्वेचा रोगों में सहायक तथा त्वथचा को चिकना बनाती है । यूरिक ऐसिड जो जोडों और रीड की हड्डीयों में जमा होती है उसे निकाल देती है गुर्दो में पथरी तथा साईटिका एंव अंण्डो कोषों में पानी भर जाने में उपयोगी है । ऐसिडिटी में तत्कांल प्रभावी है ।
S-6 (स्क्रोकफोलोसोस-6):- यह किडनी की महान औषधी है जिस प्रकार एस-2 का प्रभाव सबसे पहले मूत्राश्यण पर होता है फिर किडनी पर होता है ठीक इसी प्रकार इसका प्रभाव सबसे पहले किडनी पर होता है तत्प श्चाफत मूत्राश्य पर होता है अर्थात एस-2 से उल्टा है । यह दवा किडनी रोग किडनी में पथरी तथा शरीर में जमा व्यरर्थ पदार्थ खनिज जो शरीर में जमा होते रहते है जिसके कारण जोडो व मांसपेशियों में र्दद, गठिया आदि होता है उसे निकाल देती है किडनी की खराबी से शरीर के सूजन पर भी उपयोगी है यह शरीर से विजातीय पदार्थो को निकाल देती है । पथरी नाशक,मूत्र का ना होना रूक रूक कर होना एल्बूामिनेरिया, डायबिटीज मूत्र में शक्क र आना, आदि
S-10 (स्क्रोनफोलोसोस-10):- सर्व रोगनाशक ,पेट से सम्बशधित समस्त प्रकार के रोगों में ,यह पाचन तंत्र पर एंव उससे सम्बकधित अंगों पर कार्य करती है ,एन्टीा बैक्टेारियल होने के कारण रोगों से सुरक्षा करती है ,दस्तब,खूनी दस्त0 गैस एसिडिटी,जलन कब्जे ,डकारे आना , बुखार आदि पर प्रयोग की जाती है । पाचन रोगों में एस-1 खाने से पहले तथा खाने के बाद एस-10 लेने से उपरोक्तो रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है यह दवा शक्तिवर्द्धक है वृद्ध व्य कितयों द्वारा इस दवा का लम्बे समय तक प्रयोग करने से पाचन दोष दूर होते ही है बुढापा देर से आता है शरीर में फलेक्सीाविटी बनी रहती है ।
S-11 (स्क्रो फोलोसोस-11):- यह उल्टीट ,मचली की प्रमुख दवा है तथा पाचन सम्ब धित अंगों पर कार्य करती है । रेल बस या यात्रा करते समय जिन्हेस उल्टीहयॉ होती है या जी मचलाता है उनके लिये उपयोगी है ।
S-12 (स्क्रोयफोलोसोस-12):- ऑखों के समस्ती प्रकार के रोगों की विशेष दवा है । इसलिये इसका प्रयोग ऑखों का ऑना , मोतियाबिन्दि , ग्लू कोमा ,धुधला दिखना , ऑखों में किरकीरि होना , आखों पर जाला दिखना , ऑखों के आगे धुधलापन या फिर दिृष्टीट दोषों में भी उपयोगी है । ऑखों के संक्रामण तथा ऑखों से ऑसू आना आदि पर उपयोगी ।
S-Lass (स्क्रोरफोलोसोस लॉस ):- इसका प्रभाव ऑतो पर होता है यह कब्जम की विशेष दवा है कब्जS का बने रहना कभी दस्तो तो कभी कब्जै , हटी कब्जो ,पेट साफ न होना आदि पर उपयोगी है
L-1 (लिंन्फैाटिकोज):- भोजन पच कर जब रस बन जाता है तब इस दवा का कार्य प्रारम्भी होता है अत: यह रक्तन व रस दोनो पर कार्य करती है इनके दूषित होने पर इन्हेह स्वााभाविक स्थिति में लाती है एंव रक्तर व रस को शुद्ध करती है इसीलिये इसका उपयोग हार्मोनल इनबैलेन्सह , थायराईड , बजन बढना , बॉझपन, स्त्रीैयों में पीसीओडी की समस्याब इसका प्रभाव आर बी सी एंव डब्लूत बी सी पर भी है इसका प्राकृतिक गुण अम्लक नाशक, प्रदाह, गठिया नाशक है पाचन क्रिया के दोषों को दूर करने की अव्दितीय दवा है यह रोगमुक्ति पश्चानत उपयोग करने पर शक्तिवर्द्धक की तरह कार्य करती है ।
A-1 (एन्जिहयाटिकोज-1 ) :- यह शुद्ध रक्त को ले जाने वाली आर्टी (धमनीयों) एंव महाधमनी पर कार्य करती है रक्ती संचार में खराबी रूकावट की वजह से लो या हाई ब्लहड प्रसर होना , ब्लरड की कम्पो जिशन में खराबी ी वजह से यूरिया ,कैटिनीन ,कोलेस्ट्रा ल का बनना , यह रक्त की कमी को दूर करती है ,रक्तर का टॉनिक है ,रक्तो स्त्रा व ,नकसीर ,खूनी बबासीर , महिलाओं में मासिक धर्म के समय अधिक रक्त, स्त्रा व , आदि में उपयोगी
A-2 (एन्जि याटिकोज-2) :- यह दवा अशुद्ध रक्तर ले जाने वाली शिराओं पर कार्य करती है शिराओं में रक्त2 संचार का ठीक से न होने के कारण नसों में रक्तं जमा होना वेरीकोज वेन , साईटिका,गाठों का बनाना या सिस्टे का बनाना ,शिराओं में रक्तक जमा होने से खूनी बबासीर में , फिश्टुाला तथा शिराओं से जुडी किसी भी तरह की समस्यातओं पर उपयोग है ।
A-3 (एन्जिओयाटिकोज-3 ) :- यह दवा रक्तै के कम्पो जिशन में आई समस्त प्रकार की बीमारीयों में उसकी वजह से शरीर में जो भी रोग हो उसमें कारगर है यह ब्लसड के कार्यो को ठीक करती है एंव आर्टी वेन की खराबी ब्लागकेज को धीरे धीरे धोल देती है ,ब्लाठकेज की वजह से ब्लूड प्रेशर का बढना या कम होन ,ब्लीड के टॉक्सी न , कैटेनीन , यूरिक ऐसिड,लिम्फन ब्ल ड की खराबी को दूर करती है ।
P-1 (पेटोरेल-1 ) :- यह श्वेसन तंत्र की महा औषधी है सर्दी, खॉसी, जुखॉम ,छीकें आना, एलर्जी, दमा, फेफडों के रोग , कफ का फेफडों में जमना , इन्फ्लू्न्जाी ,लग्सल की सूजन, आदि में उपयोगी है ।
P-2 (पेटोरेल-2 ) :- लग्सा पर प्रभावी ,लग्स की एनाटामी या फिजियोलोजी के बिगड जाने से उत्प-न्न( रोगों में जैसे टी बी ,बोकाईटिस , निमोनिया ,लग्सल कैसर ,लग्सय के कोशिकाओं और टिश्यूो का छय होना सडना गलना , बीडी सिगरेट से उत्पीन्नई लग्सल कैसर आदि में उपयोगी दवा है ।
P-3 (पेटोरेल-3 ) :- बच्चोंव एंव स्त्री यों के श्वहसन तंत्र के रोगो्ं में बच्चोंो में पसली का चलना ,निमोनिया,खॉसी सर्दी , काली खॉसी , कुकर खॉसी आदि में उपयोगी है ।
P-4 (पेटोरेल-4 ) :- इस दवा का प्रभाव वृद्ध मनुष्योंो के श्वहसन तंत्रों के रोगों पर विशष रूप से होता है वृद्धों की पुरानी खॉसी, दमा , कफ का गले में या फेफडों में फॅसना , हॉफी चलना ,जुखॉम , सर्दी का बार बार होना ,खासी आदि यह वृद्ध मनुष्योंग की पर मित्र है । उने श्व,सन तंत्र को यह शक्तिशाली बनाती है । बीडी सिगरेट हुक्काि आदि के अधिक सेवन से जो श्वोसनतंत्र से सम्ब धित रोग उत्पीन्न हो उसमें यह कॉफी कारगर दवा है यह तक की वृद्धों के टी0बी0 ,दमा , श्वामस रोग आदि में उपयोगी है ।
F-1 (फेब्रिफ्यूगो-1 ) :- इसे र्दद बुखार आदि में प्राय: प्रयोग किया जाता है ,यह सेन्ट्रसल नर्व सिस्टीम से उत्प न्नफ होने वाली बीमारीयों में उपयोगी है यह नर्व की औषधी है इसलिये इसका उपयोग मिर्गी, पागलपन ,हिस्टीबरिया,लकवा, शरीर में र्दद ,वात रोग , सभी तरह के बखारों में ,रक्त की कम्पोनजिशन में आई खराबी जैसे डब्लूम बी सी या आर बी सी का घटना या बढने में अपनी सहायक दवाओं से साथ प्रयोग कर आशानुरूप परिणाम देती है ।
F-2 (फेब्रिफ्यूगो-2 ) :- यह भी उपरोक्तढ एफ-1 की तरह कार्य करती है परन्तुस इसका प्रभाव गहरा है यह पहले स्पगलीन पर कार्य करती है फिर लीवर तथा बाद में गालब्लेउडर पर कार्य करती है । पित्तापश्यप की पथरी में इसका उपयोग अपनी सहायक दवाओं के साथ किया जाता है । जीर्ण प्रकार के ज्वपर किसी भी प्रकार के बुखार व दर्दो में उपयोगी है ।
Ver-1 (वर्मीफ्यूगो-1 ) :- शरीर से समस्ती प्रकार के कीडे व वैक्टेकरिया आदि को निकालती है , इस का प्रभाव छोटी बडी ऑतों पर होने से यह पाचन क्रिया में भी सहायक है ,ऑतों से हर प्रकार के कीडों को निकालती है, यह दवा कीटाणु नाशक एंव पेट के कीडों की दवा है ।
Ver-2 (वर्मीफ्यूगो-2 ) :- इस का प्रभाव भी वर-1की भाती है परन्तुक इसका उपयोग जीर्ण प्रकार के पेट के कीडों व वैक्टेोरिया पर होता है, तथा यह उन्हेा दोबारा नही होने देती ,बार बार होने बाले पेट के कीडे व बैक्टेैरियल बीमारीयों में इसके निचले डाल्युकशन के प्रयोग के बाद दोबारा रोग न हो इसलिये इसके उच्च डायल्युयशन का प्रयोग अंतराल से किया जाता है ।
C-1 (कैंन्सररोसो -1 ) :-स्त्रीययों के जननांग की महा औषधी है परन्तुे इसका प्रभाव पुरूषों के शिशिन जननेन्द्रियों पर भी होता है यह प्रथम स्त र के कैसर को समाप्त करती है यह वृक्कन और मूत्राश्यप की पथरी के लिये रामवाण है साथ ही हिस्टींरिया रोग में भी प्रमाणित सिद्ध हुई है मासिक धर्म की कमी मूत्रायश्ये की कमजोरी प्रोस्टेट का बढना ,स्त्री्यों के समस्ती प्रकार के जननेन्द्रिय सम्बन्धित रोगो पुरूषेन्द्रिय के समस्तज प्रकार क रोगों में, मूत्र का न होना या बहुमूत्र ,गठीया बात,स्त्रीययों के गर्भाश्यू के रोग आदि में उपयोगी है ।
C-2 (कैंन्सदरोसो -2 ) :-यह दवा एस-2 की तरह मूत्राश्यत पर कार्य करती है । जहॉ एस-2 मूत्राश्यन के लिम्फ2 पर कार्य करती है वही यह मूत्राश्य व उसके संचालन अंगों पर कार्य करती ह अत: मूत्राश्यष से सम्बयधित रोगां पर इसका प्रयाग एस-2 क साथ कर अच्छेप परिणाम प्राप्त किये जा सकते है मूत्राश्य के कैसर ,मिर्गी के लिये यह रामवाण है , पुरूषो के जननेन्द्रिय रोगो से सम्बनधित समस्याैओं पर अन्यै दवाओं के साथ इसका उपयोग कर उचित परिणाम प्राप्तप किये जा सकते है ।
C-3 (कैंन्सअरोसो -3 ) :- यह दवा भी एस-3 की भॉती कार्य करती है अर्थात त्वतचा रोग ,खुजल त्व्चा का क्षय , त्व चा के कोशिकाओं एंव टिश्यू की बरबादी उसका सडना गलना ,धॉव गमड ,मवाद यह दूषित तत्वों को निकाल कर नये सेल्सच एंव टिश्यूट का निमार्ण करती है । सभी प्रकार के त्वॉचा रोग खुजली, एक्जीषमा, एलर्जी ,ल्युशकोडर्मा , सोरायसिस,मुहासे ,ब्लेदक हैड , दाग धब्बेच ,रिंग वर्म, यह दवा हड्डीयों के रोगों पर अच्छां कार्य करती है,विशेष छोटी हडियों पर , धुटनों के कार्टिलेज का घिस जाना कडा हो जाना टेडा पड जाना , हड्रडीयों का सडना ,गलना, क्षय होना आदि ,दस्तों व डायरिया में भी उपयोगी है , स्त्री् पुरूषों के जननेन्द्रीययोपर भी इसका विशेष प्रभाव है ।
C-4 (कैंन्सपरोसो -4 ) :- इसे बोन रिमेडिस मेडिसन भी कहते है अस्थियों और उतको की दवा है , यह दवा हड्डी के कठिन से कठिन भागों पर कार्य कार्य करती है अर्थात हाथ की अंगुलियों से लेकर बालो तक हड्रडीयों का सडना, क्षय होना ,रिकेटस,हड्रयों का टूटना ,चोट लगना । यह चौथे स्तरर तक के कैसर में उपयोगी है । पस फारमेशन को यदि पकने का है तो पका कर या सूखने का है तो सुखा देती है ,अण्डप कोष में पानी भर जाना ,सिर का गंजापन ,मोटापा में भी यह उपयोगी है बादी बबासीर में अपनी अन्यअ दवाओं के साथ प्रयोग कर उचित परिणाम प्राप्तं किये जा सकते है । यह दवा हड्रडीयों के विकाश में भी सहयोगी है ।
C-5 (कैंन्स रोसो -5 ) :- यह दवा सैल्सय और टिश्यूद रिमेडीज दवा है जिस तरह से एस-5 लीवर पर कार्य करती है उसी प्रकार यह दवा भी लीवर पर एंव उसके सैल्स एंव टिश्यूव पर कार्य करती है । त्व्चा रोगों में भी उपयोगी , पथरी , बबासीर,गाठे, टयूमर ,सिस्टज, स्त्रीष पुरूषो के रोगों पर , इस दवा का प्रभाव पाचन तंत्र पर होने के कारण पुराने अर्जीण ,हिचकी आना ,आंतों में सूजन ,पेट फूलना, खट्टी डकार ऐसिडिटी आदि में उपयोगी । त्वरचा को एस-5 के साथ उपयोग करने पर चिकना मुलायम बनाती है ।
C-6 (कैंन्स रोसो -6 ) :- यह दवा किडनी रोगियों के लिये जीवनदायनी दवा है ,जिस तरह एस-6 किडनी की खराबी पर कार्य करती है परन्तुव जब किडनी के सैल्स- व टिश्यून डेमेज होने लगते है तब सी-6 का प्रयोग एस-6 के साथ कर अच्छेस परिणाम प्राप्तर किये जा सकते है । यह दवा अव्यहर्थ तत्वोंक को शरीर से बाहर निकालती है ,सिस्टछ, ट्यूमर ,गाठे,कैंसर आदि में उपयोगी मूत्राश्यत संक्रामण , यूरेनरी ट्रेक्ट इंफेक्शनन ,तथा किडनी में आई खराबी आदि पर ।
C-10 (कैंन्सइरोसो -10 ) :- सिम्फा ईटिक तथा पैरासिम्फा ईटिक नर्व पर प्रभावित पाचन दोष जब नर्व सिस्टरम के कारण हो छोटी बडी ऑत से लेकर मल निष्काडसन , उत्सर्जनतंत्र के नर्व सिस्टफम पर कार्य करती है इसलिये भोजन का न पचना,कब्ज ,मल का सूख जाना ,बायुशूल ,कभी दस्ति कभी कब्ज , अपच , इसे एस-10 के साथ प्रयोग कर आशानुरूप परिणाम प्राप्तक किये जा सकते है । यह लीवरी की महान दवा है लीवर की वजह से उत्पसन्न- रोग ,लीवर में सिस्टर गाठे या उसके कार्यो का बिगडइ जाने पर उपयोगी है ।
C-13 (कैंन्सजरोसो -13 ) :- यह हलक अर्थात निगलने वाले अवयव एव स्वररयत्र, की विशेष दवा है गले के संक्रामण ,डिप्थीजरिया ,गले में सूजन र्दद ,निमोनिया,टॉसिल , आवाज बैठना ,बार बार हिचकी आना ,गला बैठना ,खासी दमा श्वालस रोग ब्रोकाईटिस ,कफ का गले में जमा होना ,मुंह के धॉव ,ब्ल ड कैसर में भी उपयोगी है ।
C-15 (कैंन्सररोसो -15 ) :- इस दवा का प्रभाव अमाश्यम पर है ,यह भी कैंन्स रोसोस समूह की औषधी की तरह सैल्सो एव टिश्यू रिमेडीस दवा है अर्थात अमाश्या के सैल्सह एव टिश्यूह की बनावट में खराबी ,उसका सिकुड जाना , पाचन रोग ,ऐसिडिटी , चयापचय का ठीक से कार्य न करना , पाचन क्रिया की समस्याउओं में यह दवा पाचन रसों को नियमित करती है ।
C-17 (कैंन्सेरोसो -17 ) :- मूत्ररोगों व मूत्र संस्थासन की विशेष औषधी है , मधुमेह रोग के लिये तो बरदान है , पेशाब का बार बार होना, बहुमूत्र , मूत्र में शुगर आना , इंश्यूिलिन का न बनना , मूत्रमार्ग में इन्फे क्शहन, हार्मोनल गडबडी , ऐसे रोगी जिन्हें बार बार इंश्यू लीन लेना पडता हो उन्हेम इस दवा के नियमित प्रयोग से इंश्यूफलीन लेने की आवश्यरकता नही पडती एंव धीरे धीरे पूरी तरह से ठीक हो जाती है , प्रस्टेूट की सूजन ,किडनी तथा यह दवा मूत्रा मार्ग की पथरी को निकालने में सहायक है ।
Ven-1 (वेनेरियो -1 ) :-समस्ता प्रकार के वेनेरियल बीमारीयों में एंव इससे उत्पंन्नय होने वाले रोगों में यह स्त्री पुरूषों की जननेन्द्रिय पर प्रभावी दवा है । सुजाक, उपद्रश, पैतृक रोग जो पीढी दर पीढी चली आ रही हो उस अत्य न्तज उपयोगी है । प्रोस्टे।ट ग्रन्थी् के सूजन व र्दद आदि में अन्यी दवाओं के साथ कर उचित परिणाम प्राप्तो किये जा सकते है ।
BE(ब्लूा इलैक्ट्री सिटी):- इस दवा का कार्य शुद्ध रक्तआ ले जाने वाली धमनियों पर है ,यह हिद्रय में साफ रक्त( की सप्लाोई बढाती है एव दूषित रक्तस को बाहर निकालने में सहायता करती है यह हिद्रय के टॉनिक की तरह कार्य करती है एंव हिद्रय को बलवान बनाती है ,शरीर के किसी भी अंग से रक्तॉस्त्रा्व होने पर इसके वाहय व अंतरि प्रयोग से रक्ती को रोका जा सकता है , धमनियों में आई रूकावट रक्त दोष जलने झुलसने, जहरीले जीव जन्तुे के काटने, आदि में इसके वाहय एंव अंतरिक प्रयोग से उचित परिणाम प्राप्ते किये जा सकते है यह ब्लनड कैंसर की अच्छी दवा है ,मिर्गी, लकवा, हिस्टी रिया आदि में । RE (रेड इलैक्ट्री सिटी):- यह उत्तेअजक बिजली है रक्त, संचार को बढाती है शरीर में ऊर्जा व शक्ति देने वाली बलवद्धक धमे रक्त संचार की वजह से अंगों व शरीर में आई शिथिलता ,निष्क्रियता शरीर या अंगो का शून्यकपन, ठंडापन, झुनझुनी, नाडी गति का मंद पडना, मसल्सय पेन, या अन्य् प्रकार के दर्दो आदि में यह रोगग्रस्थन अंगों पर लगान कर उचित परिणाम प्राप्ती किये जा सकते ।
YE (यलो इलैक्ट्री सिटी):- यह उत्तेतजना को शांत करने वाली दवा है उत्तेसजना शारीरिक या मानसिक हो जैसे क्रोध, चिडचिडापन , जिद्ध करना, लडने झगडने की प्रवृति बच्चों का रोते रहना गोद में धुमने का जिद्ध , सामान फेकना , आदि शारीरिक उत्तेहजना जैसे र्दद ,हाई ब्ल डप्रेशर , सूजन ,घ्बाराहट,जलन या प्रत्येरक कार्यो की गति तीब्र हो , पाचन दोष, बुखार ,पेट मे कीडे, बैक्टेपरिया , त्वनचा में जलन ,खुजली ,दाने निकलना ,एक्जीोमा,ल्यु,कोर्डमा ,एलर्जी इत्यासदि की उत्तेवजित अवस्था,ओं में इस दवा का अंतरिक व वाहय प्रयोग कर आशानुरूप परिणा प्राप्ती किये जा सकते है
GE (ग्रीन इलैक्ट्री सिटी):- किसी भी प्रकार के रिसाव ,धॉव का सडना गलना, गाठे, सिस्टत , रिसाव शिराओं में रूकावट , थक्का जमना , दूषित पदार्थो को शरीर से बाहर निकालती है कैंसर के धॉव व र्दद में मॉस पेशी व जोडों का र्दद, साईटिका, चोट, मोच, ट्यूमर, बबासीर भगंदर के धॉव, में अंतरिक व वाहय प्रयोग की जाती है ।
WE (व्हा ईट इलैक्ट्री सिटी) :- यह एक शक्तिवृद्धक , नीद लाने वाली , तथा शारीरिक विकास में सहायक है यह नर्वस सिस्टम पर कार्य करती है एंव उसके अवरोध को दूर करती है । रक्तक की कमी को दूर करती है बच्चोंा की लम्बाकई बढाने में सहायक, शरीर से विषाक्ती पदार्थो को निकालती है , याददास्थं को बढाती है किसी भी बीमारी के बाद आई कमजोरी को दूर करने में सहायक है ।
APP (अकुआ परला पेली) :-यह दवा त्व चा को स्निग्धन चमकदार मुलायम बनाती है त्वाचा के समस्तो प्रकार की समस्यारओं में जैसे त्व चा के रंग में परिवर्तन बदरंगी त्वेचा, मस्सेत, मुंहासे, ब्लै,क हैड, कील एग्जीामा , सोराईसिस, ल्युरकोडर्मा , आदि इस दवा को सी-4 के साथ चहरे व त्व चा पर लगा कर त्वPचा को चमकदार मुलायम व त्वेचा के रंग का साफ बनाया जा सकता है यह दवा त्व चा का टॉनिक है इसे त्व चा पर लम्बे् समय तक लगाकर उचित परिणाम प्राप्तय किये जा सकते है ।
डॉ0कृष्णक भूषण सिंह चन्देपल
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें