वेनेरियोज-1 डॉ0 कृष्णभूषण सिंह चन्देल
वेनेरियोज-1
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क्र0 |
औषधिय पौधे |
अन्य नाम |
मात्रा
प्रतिशत |
उपयोग |
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1 |
ALTHAEA OFFICINALIS |
मर्शिमैलो |
10 |
मूत्रपथ की सूजन,व मूत्र सम्बधित
बीमारीयों में |
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2 |
BETULA ALBA
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Birch Tree,भोजपत्र |
5 |
गुर्दे ,हिद्रय रोग, हडियो, गठिया |
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3 |
MYRTUS COMMUNUS |
मरटेल,वायु मर्टल |
10 |
एन्टीऑक्सीटेन्ट एन्टी
कैसर,जीवाणुरोधी,मधुमेह नाशक |
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4 |
EUCALYPTUS GLOBULUS |
नीलगिरी |
5 |
बैक्टेरिया, फंगस,एलर्जी,संक्रामण |
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5 |
POPULUS TRCMULADIN |
क्वेकिंग एस्पेन, |
10 |
मूत्राश्य ,मूत्रमार्ग और प्रोस्टेट
के रोग, मूत्राश्य
की गर्दन में सूजन व जलन |
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`6 |
ROSA
CANINA |
डॉगरोज, |
10 |
यूरेनरी इंफेक्शन, ,पेशाब बन्द होना |
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7 |
SOLANUM DULCAMARA |
विटरवाइट,नाईटशीड ,विटर स्वीट |
5 |
सूजन को कम करता ,त्वचा रोग फंगल,खुजली, जीवाणुरोधी |
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8 |
STEFFENSIA
ELONGATA |
लम्बी काली
मिर्च, पीपली,सैनिक जडी बूटी,पाईपर
ग्रैनुलोसम ,मेटिको |
30 |
अल्सर, जननांग मूत्र सम्बधी, , पेचिश , कामोद्धीपक मधुमेह ,पीलिया और लीवर संक्रामण से लडता है , विषाक्त पदार्थो को शरीर
से बाहर निकालती है । जीवाणुरोधी, अमीबिक गुण
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9 |
TILIA EUROPAEA |
यूरोपीय चून ,लिंडन , पल्लीडा ,आम नीबू ,छोटे पत्ते वाला नीबू |
5 |
खुजल,फुंसीयों
मूत्रवर्धक एन्टी स्पास्मोडिक |
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10 |
VERONICA OFFICINALIS |
Speed well, हीथ स्पीडवेल, जिप्सीवीड, |
10 |
एन्टीऑक्सीटेन्ट जीवाणुरोधी, बलगम को निकालने में, गुर्दे की बीमारी |
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11 |
VIBURNUM OPULUS |
गेल्डर गुलाब |
10 |
बांझपन,प्रजनन अंगो की समस्याओं पर |
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12 |
SMILAX MEDICA (Sarsaperilla) |
उशब कुमारिका,उशब मगरबी,,वनमधुस्नाही |
20 |
पेशाब सम्बधित बीमारीयों में ,सुजाक,पथरी त्वचा पर उदभेद |
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13 |
VINCA MINOR |
Common Name Periwinkle पेरिविंकल) |
5 |
-संक्रामणरोधी, सिर खूजली, चर्मरोग, बदबूदार रस का निकलना, |
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14 |
THUJA OCCIDENTALIS |
व्हाइट सीडर, सफेद देवदार, अर्बोटिवे ,आर्बरविटस,,विद्यया, |
10 |
मस्से, त्वचा
संक्रामण , जननांगों, मूत्राश्य ,सुजाक |
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15 |
CLEMATIS ERECTA |
ग्राऊंड विर्जिनबॉवर, |
10 |
गनोरिया की
उत्कृष्ट दवा |
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16 |
CANABIS SATIVA |
भांग, |
20 |
दमा गनोरिया , ,प्रमेह के धॉव, पेशाब में रक्त स्त्राव |
वेनेरियोज-1
इलैक्ट्रो होम्योपैथिक में वेन दवा के बिना उपचार
की कल्पना ही नही की जा सकती, विव्दवान चिकित्कों
का अभिमत है की यह दवा पचास प्रतिशत रोगों में किसी न किसी रूप में प्रयोग की जाने
वाली एक महत्वपूर्ण दवा है । वेनेरियल बीमारीयों से या सैक्सुवल ट्रांसमिशन से होने
वाली बीमारी व उसके बाद उनकी संतानों को विरासत में जो बीमारीयॉ चाहे वह कुछ भी क्यो
न हो उसमें इसका प्रयोग किसी न किसी रूप में होता है । यह दवा शरीर से विषाक्त पदार्थो
को बाहर निकाल देती है ।
वेनेरियल बीमारी:- सेक्सुवल ट्रांसमीशन से उत्पन्न होने वाली समस्त
प्रकार की बीमारीयों में इसका प्रयेाग होता है । इससे जो भी बीमारीयॉ बीरासत में बच्चों
को हस्तान्तरित होती है उसमें इसका प्रयोग किया जाता है । वैसे तो प्रमुख रूप से
यह गनोरिया के रोगों में प्रयोग की जाती है , पेशाब के रोग ,पेशाब में जलन , बूदॅ बूदॅ पेशाब का होना ,पेशाब के रास्ते में इंफेक्शन, पेशाब में पस का आना ,लिग में फोडा, या धॉव आदि होने पर , जेनाईटल आर्गन्स में मस्सों
का या फिर गाठों का होना ,मूत्र की थैली में पेशाब का भरा होना
बूदॅ बूदॅ पेशाब का होना, पेशाब में जलन के साथ खुजली का होना
,मूत्राश्य में धॉव ,सडन, पस आदि में इसका प्रयोग अन्य सहायक या पूरक दवाओं के साथ कर अच्छे परिणाम
प्राप्त किये जा सकते है । इस दवा का प्रभाव सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम पर होने से यह
वंशानुक्रमण व्दारा आये रोगों में जैसे चक्कर आना ,जड बुद्धी
व याददास्त का कम होना , श्वसन तंत्र के रोग खॉसी ,बलगम का न निकलना , दमा ,आदि के साथ मिर्गी रोग में भी करते है । इस दवा
का प्रधान प्रभाव जेनाईटल आर्गन पर होता है उपदंश की वजह से होने वाले रोग वृक्क रोग
नामर्दी ,
त्वचा
रोग:- त्वचा के रोग जो वेनेरियल बीमारी की वजह से हो या
फिर बिरासत में उन्हे मिला हो उसमें भी यह दवा का उपयोग अन्य सहायक औषधीयों के साथ
कर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । त्वचा पर कही पर भी मस्से होना, भूसी उतरना, सोराईसेस, स्कीन
एलर्जी , त्वचा का फटना , फोडा, फुंसी, धॉव, सडने वाले धॉव जिसमें
बदबू हो , कैंसर के धॉव ,उपदंश के कारण
उत्पन्न होने वाले उपर्सग धॉव ,नॉक के मॉस का बढना
स्त्रीयों
के रोग:- गनोरिया की वजह से उत्पन्न समस्त रोग जिसका वर्णन
उपर किया जा चुका है उसमें इसका प्रयोग अन्य सहायक दवाओं के साथ करना चाहिये , इसके साथ लिकोरिया, माहवारी से सम्बन्धित परेशानीयों
व रोग में , हार्मोंस का इन बेलेन्स होने पर , महिलाओं में बांक्षपन, उपदंश के कारण गर्भाश्य के रोग
, गर्भाश्य की सूजन ,गर्भाश्य में धूमण
या सिस्ट या धॉव , जिद्दी किस्म के लिकोरिया , स्नायु पीडा
पुरूष
रोग:- पुरूषों में स्पर्म का कम होना , स्पर्म का कमजोर होना , सीमन की कमी, गुप्त रोग आदि । यह पुरूषों में प्रोस्टेट की बीमारी जिसमें वृद्धावस्था
के कारण प्रोस्टेट के बढने पर जिसकी वजह से पेशाब का रूक जाना या बूदॅ बूर्द होना
, बार बार पेशाब जाना पेशाब में जलन , पेशाब
का पूरा न होना , आदि में इसका उपयोग अन्य सहायक औषधीयों के
साथ करना चाहिये । पेनिस को ढकने वाली त्वचा पर होने से फाईमोसिस व पेनिस की त्वचा
का उपर नीचे न होने पर भी इसका प्रयोग किया जाता है । स्त्री व पुरूषों के प्रजनन
सम्बधित रोगों में जैसा कि पहले लिखा जा चुका है ।
यह
दवा किसी भी प्रकार के सिस्ट व गाठों को गला देती है
बालों
व नाखूनों :- बालों व नाखूनों की समस्या जैसे बालों का असमय सफेद
होना व झडना , गंजापन, नाखूनों का टेढा या
नाखूनों का टूटना , नाखूनों का धॅस जाना नाखूनों का काला पड जाना
आदि में इसका प्रयोग अन्य सहायक औषधियों के साथ कर आशानुरूप परिणाम प्राप्त किये
जा सकते है ।
बच्चों
के रोग:- बच्चों का शारीरिक विकास न होना , उम्र के अनुसार लम्बाई का न बढना , दॉतों का समय पर
न निकलना , याददास्त का कम होना , बच्चों
के जेनाईटल आर्गन्स का विकास न होना , बच्चों की बुरी आदतें
बुखार:-
बुखार में तो वैसे और भी कई दवाये है, जिसका प्रयोग कर इस रोग में सफलता पाई जा सकती है परन्तु यदि वेनेरियल बीमारीयों
की वजह से या अन्य किसी भी दवा से जब बुखार न जाये तो इसका प्रयोग एफ ग्रुप की दवाओं
के साथ कर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । वैसे वायरल फीवर में भी इसके प्रयोग
करने की सिफारिश की गई है । यह दवा किसी भी
तरह के बुखार में जैसे मलेरिया, वायरल फीवर, चेचक, या कोई भी बुखार हो उसे ठीक कर देती है
पथरी:-
पथरी होने पर पथरी के साथ दी जाने वाली दवाओं के साथ इसका प्रयोग करने से यह पथरी को
गलाने में सहायता करती है एंव यह अपने गुणों के अनुसार जैसा की पहले ही हमने लिखा है
कि यह शरीर से विषाक्त पदार्थो केा बाहर निकाल देती है अर्थात जब पथरी अन्या औषधीयों
को देने से गल जाये तब उसे यह शरीर से बाहर मूत्र मार्ग के माध्यम से बाहर निकाल देती
है ।
शरीर
से विषाक्त पदार्थो को निकालना :- जैसा कि पहले ही कहॉ गया है
कि यह दवा शरीर से विषाक्त पदार्थो को निकाल देती है इसी लिये इसका उपयोग यूरिक ऐसिड
व यूरिया के बढने पर किया जाता है जिसकी वजह से गठिया के रोग या गठिया का र्दद होता
है । अत: इसका प्रयोग र्दद निवारक अन्य दवाओं के साथ गठिया रोगों में कर उचित परिणाम
प्राप्त किये जा सकते है । यदि शरीर से पसीना न आ रहा हो तो इसको देने से पसीना आने
लगता है एंव पसीने के रूक जाने से जो भी रोग होते है उसमें लाभ होता है । तथा इसका
प्रयोग शरीर में मॉस व हड्डीयों के बढने पर किया जाता है । यह दवा मूत्रल व कब्ज नाशक
भी है एंव किसी भी प्रकार के कीटाणुओं को मार देती है, या शरीर से बाहर कर देती है । अत: यह कीटाणु नाशक भी है । अस्थियों में र्दद, सूजन, गलना ,दॉतों के रोग, यह दवा एन्टीसेप्टीक एंव एन्टी वायरल भी है ।
मधुमेह:-
इस दवा का प्रयोग मधुमेह की बीमारीयों में अन्य सहायक औषधियों के साथ कर उचित परिणाम
प्राप्त किये जा सकते है ।
डॉ0 कृष्णभूषण
सिंह चन्देल
जन जागरण चैरीटेबिल क्लीनिक
मकरोनिया सागर म0प्र0
मो0 ९९२६४३६३०४
D/EH /PHARMACY22/ Ven-1
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