वर्मीफ्युगोज-2. Ver-2
वर्मीफ्युगोज-2
वर्मीफ्यूगोज-2 -- वर-1 से गहरा प्रभाव रखने वाली दवा है जब कभी वर-1 से परिणाम न मिले तब इसका आंतरिक व वाहय प्रयेाग कर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । यह इलैक्ट्रो होम्योपैथिक की एन्टी बायोटिक दवा है । जिस प्रकार वर-1 कार्य करती है उसी प्रकार के रोगों में यह दवा कार्य करती है । परन्तु इसका प्रभाव गहरा होता है । यह दवा भी पेट में किसी भी प्रकार के कीडे हो उसे निकाल देती है । यह दवा सभी प्रकार के बैक्टेरियल बीमारी में भी उपयोगी है मुंह व गले में छाले धॉव या इंफेक्शन में इसका गरारा करने से लाभ होता है । बैक्टेरियल बीमारीयों में यदि त्वचा रोग , एग्जीमा, आर्टिकेरिया, त्वचा में खुजली या त्वचा रोग हो तो इसका उपयोग अन्य सहायक औषधियों के साथ कर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है ,यह दवा कब्ज , सूखा मल व गुदाद्वार में खूजली आदि में एस लास, वाई ई के साथ प्रयोग कर उचित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । जैसाकि पहले ही बतलाया जा चुका है कि यह दवा एन्टी बैक्टेरियल है अत: संक्रामक रोग , व बुखार आदि एफ ग्रुप की दवाओं के साथ इसका प्रयेाग किया जा सकता है । उल्टी दस्त पेट में गैस बनना मलद्वार के रोग मूत्राश्य के रोग , जो बैक्टेरिया की वजह से हो इसका उपयोग किया जा सकता है । बालों के रोग बालों में फंगस होना यह दवा एण्टीसेप्टीक की तरह से भी कार्य कारती है । इसके साथ इसका उपयोग नीद न आना , आधा शीशी का र्दद , धॉव , फफोले पडना, बैक्टेरिया की वजह से धॉवों का सडना , । पेशाब के रोगों में इसका उपयोग सी-17 के साथ करने से अच्छे परिणाम मिलते है । वात पीडा , मॉसपेशियों में र्दद ,मिर्गी के दौरे , दिमाक में कीडे आदि की वजह से उत्पन्न रोगों में इसका प्रयोग किया जा सकता है । मॉसपेशियों के र्दद ,बैक्टेरियल फंगल, एंव धॉव आदि में इसका अंतरिक व वाहय प्रयेाग करते है । ऐनिमा आदि में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है । बच्चों की खॉसी , दॉत निकलते समय दस्तों का लगना, पीरियड का रूक रूक कर होना ,बच्चों का जिद्द करना , चिडचिडापन, जिद्दी स्वाभाव के बच्चे हमेशा रोते रहना , अनुभवों व इसमे उपयोग होने वाली कई वनस्पतियों में बैक्टेरिया को खत्म करने का प्रभाव है । वनस्पतियों के उपयोग इतिहास मे पाया गया की कई ऐसे स्थान जहाँ का पानी दुसित होता था उस पानी मे बीमारियों को फैलाने वाले बैक्टीरिया मौजूद थे ऐसी परस्थितियों मे इसमें उपयोग की कुछ वनस्पतियों को वहां के वासिंदे पीने के पानी मे इसकी थोडी सी मात्रा डाल दिया करते थे । अनुभवो से ज्ञात हुआ है बरसात के मौसम मे नलो से जो दुसित पानी आता हैं उसमे एक दो बूँद वर्मीफ्युगोज-2 डाल देने से बैक्टीरियल बीमारियों से बचा जा सकता है । संक्रमण बीमारियों के फैलने पर इसके प्रयोग से संक्रमण से बचा जा सकता है
प्रथम डायल्युशन- इसका प्रथम डायल्युशन इसकी तेज मात्रा है अत: इसका प्रयोग कब्ज,मल सूखने पर व पेट के कीडों को निकालने में किया जाता है ।
दूसरा डायल्युशन- महिलाओं के पीरियड को सुचारू से नियमित करता है यदि पीरियड रूक रूक कर आ रहा हो तो इसके दूसरे डायल्युशन का प्रयोग करना चाहिये ा
तीसरा डायल्युशन- बच्चों की खॉसी , दॉत निकलते समय दस्तों का लगना
उच्च डायल्युशन- इसके उच्चे डायल्युशन का प्रयोग सभी तरह के दिमाकी रोग ,आधाशीशी के र्दद में मिर्गी के दौरे, दिमाक में किसी कीडे की वजह से उत्पन्न रोगों में ।
डॉ0 कृष्णभूषण सिंह चन्देल
मो0-9926436304
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