ब्‍लू इलैक्‍ट्री सिटी (नीली बिजली) डॉ0 सत्‍यम सिंह चन्‍देल

 

                         ब्‍लू इलैक्‍ट्री सिटी (नीली बिजली)


  इसका प्रभाव रक्‍त संचालन की धमनियों पर है जो शुद्ध रक्‍त को लेकर हमारे सम्‍पूर्ण केशिकाओं में रक्‍त का वितरण करती है, यह एक घनात्‍मक इलैक्‍ट्रीसिटी है, अर्थात इसका प्रयोग शरीर के योग न देने वाले स्‍थानों पर अर्थात नेगेटिव भाग पर किया जाता है । धमनी (आर्टरी) रोगों में यह औषधिय अच्‍छा कार्य करती है, धमनियों में रक्‍त की कमी या रक्‍त की अधिकता तथा उसके चाल, एवं उसके कार्यो में आई रूकावट में यह अपनी सहायक औषधि ए-3 के साथ उपयोग करने पर अच्‍छे परिणाम देती है । रक्‍त का दोषित होना, रक्‍त में टॉक्‍सीन, श्‍वेत रक्‍त कणिकाओं (डब्‍लू बी सी) का बढ जाना, लाल रक्‍त कणिकाओं की कमी आदि में इस दवा का प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ करने पर उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है । ब्‍लू इलैक्‍ट्रीसिटी रक्‍त कैंसर की विशेष औषधि है ।

दुषित पर्दाथों व नशे के दुष परिणाम :- चाय, तम्‍बाखू ,बीडी, सिगरेट, शराब के नशे से उत्‍पन्‍न हुये रोगों को यह दूर करती है । यह दवा रक्‍त को शुद्ध करती है रक्‍त में आये टाक्‍सीन को यह दूर करती है ,रक्‍त में आई कमी व अधिकता को यह ठीक करती है । धमनीयों में रक्‍त के प्रवाह को ठीक करती है । इसके साथ ही रक्‍त कणों में कमी व अधिकता को ठीक करती है ।

पेट के रोग :- पाचन तंत्र से सम्‍बधित रोगों में, ऐसेडिटी, पेट में गडगडाहट, पेट में अल्‍सर, गले व सीने में जलन का होना ,

श्‍वसनतंत्र के रोग:- गले के रोगों, मुंह में छाले, गले में टॉसिल होना, श्‍वसन तंत्र से जुडे रोगों में ,इसके अतिरिक्‍त , बलगम का जमना, बलगम न निकलता हो तो इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ जैसे पी ग्रुप की औषधियों से करने पर यह बलगम को निकाल देती है । गले में खॅरास , छाती में कफ जमा होने से गडगडाहट होना, नाक या कफ के साथ से खून आना आदि में इसका प्रयोग अपनी सहायक औषधियों के साथ करने पर उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है गले में र्दद होने पर इसका प्रयोग सी-13 के साथ करने पर अच्‍छे परिणाम मिलते है । गले व मुंह के रोगों में इसका प्रयोग सी-13 के साथ गरारे करने से भी उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है ।

हिद्रय रोग:- यह औषधिय हिद्रय में साफ रक्‍त की सप्‍लाई को बढाती है एंव दुषित रक्‍त को बाहर निकालने में सहायता करती है । रक्‍त को यह शुद्ध करती है , हिद्रयघात होना हिद्रय का धडकना कम अधिक होना अर्थात हम कह सकते है कि यह दवा हिद्रय के टॉनिक की तरह से कार्य करती है एंव हिद्रय को बलवान बनाती है, रक्‍त संचार को ठीक करती है । हिद्रयघात होने या हिद्रय से सम्‍बधित परेशानीयों में इसे छाती पर लगाने से भी उचित परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है । ब्‍लड प्रेशर के रोगीयों को निगेटिव डोज एंव निम्‍न रक्‍त चाप के रोगीयों को पॉजेटिव डोज देना चाहिये । यह दवा मस्तिक ,पिटयुटरी ग्रन्थि एंव रक्‍त धमनियों पर प्रभावी होने से यह मस्तिक सम्‍बन्धित व्‍याधियों में जैसे मिरगी, हिस्‍टीरिया, लकवा एंव शरीर में एठन होना, मस्तिक में रक्‍त संचय ,कानों से भनभनाहट की आवाज सुनाई देना, चक्‍कर आना आदि में इसका प्रयेाग सफलतापूर्वक किया जाता है  । इसके मूल अर्क को हिद्रय में लगाने से हिद्रय रोगों में लाभ होता है एंव हिद्रय को बल मिलता है ।

स्‍त्रीय रोग:- स्‍त्रीयों में मासिक धर्म का अनियमित होना कम या अधिक होना या रक्‍त में थक्‍के जमना यह दवा ब्‍लड सकुलेशन को तेज करती है, अनावश्‍यक रक्‍त स्‍त्राव को रोकती है । गर्भपात होना, गर्भ का कैंसर ,गर्भाश्‍य के सभी रोगों में यह दवा अच्‍छा कार्य करती है, यह दवा मासिक धर्म को नियमित करती है । स्‍त्रीय रोगों में यह सी-1 के साथ प्रयोग करने से उचित परिणाम मिलते है ।

रक्‍त स्‍त्राव :- शरीर में किसी भी अंग से रक्‍त स्‍त्राव होने पर इसके प्रयोग से रक्‍त स्‍त्रावों ( रक्‍त का बहना) को रोका जा सकता है, शरीर के किसी भी अंग मुंह, नाक, मूत्रमार्ग से रक्‍त स्‍त्रावों गर्भाश्‍य, खूनी बबासीर, पेट से सम्‍बधित परेशानीयॉ, उल्टी में, या फिर चोट आदि के कारण रक्‍त बह रहा हो तो इस दवा के प्रयोग से उसे आसानी से रोका जा सकता है । यह दवा रक्‍त को रोकने की अच्‍छी दवा है । यह दवा रक्‍त प्रकृति के रोगीयों के लिये रामबाण दवा है । इसका प्राकृतिक गुण रक्‍त नाडियों को सिकोडने का है । रक्‍त संचार में आई खराबी की वहज से या रक्‍त सप्‍लाई के रूकने के कारण शरीर में नीले नीले गांठे सी बन जाती हो या रक्‍त संचार के न पहुचने से वहॉ पर शुन्‍यपन आना, झुननुनी होना, उस स्‍थान में संवेदना का अभाव होना आदि में इसका प्रयोग किया जाता है । 

अन्‍य रोगों में :-यह औषधिय रक्‍त स्‍त्रवों चाहे शरीर के अंतरिक हिस्‍से जैसे नाक, मुहॅ, या बबासीर की वजह से हो रहा हो या फिर शरीर के वाहय कारण जैसे कट जाना, छिल जाने की वजह से इसके अंतरिक प्रयोग व लगाने से रक्‍त का बहना तत्‍काल बन्‍द हो जाता है, इसलिये प्राय: अधिकाश चि‍कित्‍सक इसका प्रयोंग रक्‍त के बहने को रोकने के लिये करते है ।  इसका प्रयोग जलने, झुलसने, या जहरीले जीव जन्‍तु के काटने पर जलन होना आदि में इसका वाहय एंव अंतरिक प्रयोग करने से आशातीत सफलता मिलती है । नाक, कान ,गला ,ऑखों के रोग, ऑखों में लालीमा होना उसमें सूजन व जलन, ऑखों में रक्‍त संचय, रोहा होने पर इसकी सहायक औषधि एस-12 के साथ इसका प्रयोग करना चाहिये । मॉस पेशियों के ढीला पड जाने पर, हाथ व पैरो के तलुवों से अत्‍याधिक पसीना निकलने पर इसका प्रयोग किया जाता है । ब्‍लू इलैक्‍ट्रीसिटी का प्रयोग शरीर के नेगेटिव स्‍थानों पर करने से आशातीत परिणाम मिलते है , इसका प्राकृतिक गुण पीडा नाशक है 

सावधानीयॉ :- यह औषधिय रक्‍त नाडियों को सिकोडती है, इससे रक्‍त प्रवाह कम होता है, ऐसी स्थिति में जहॉ कही निम्‍न रक्‍त चाप हो इसका प्रयोग न करे । इसका प्रयोग ऐसे समय करना चाहिये जब रक्‍त संचालन तीब्र हो रेड इलैक्‍ट्रीसिटी एंव यलो इलैक्‍ट्रीसिटी इससे विरूद्ध प्रभाव रखती है, यह रक्‍त नाडियों को फैला देती है जिससे रक्‍त का बहाव तीब्र हो जाता है, ऐसे स्थितियों में जिन रोगीयों में रक्‍त प्रवाह तीब्र हो लाल इलैट्रीसिटी एंव पीली इलैक्‍ट्रीसिटी का प्रयोग नही करना चाहिये ।

डायलूशन:- जैसाकि आप सभी इस बात को अच्‍छी तरह से जानते है कि औषधिय का पाजिटिव डोज याने सीधे अर्थो में जिस औषधिय को देने से वह अपने गुण धर्मो के अनुसार शरीर में प्रभाव डालती है या शरीर के कार्यो को बढा देती है, इसे ही हम पॉजिटिव मात्रा या डोज कहते है । अर्थात इस औषधिय के धनात्‍मक डोज डी-1 देने से रक्‍त संचार तीब्र होगा अर्थात हम इसके धनात्‍मक डोज का प्रयोग निम्‍न रक्‍त चाप में व रक्‍त की कमी को दूर करने में करते है, खूनी खॉसी , महिलाओं में एम सी का समय पर न होना , या एम सी के रूक जाने पर हमें इसके धनात्‍मक डायलूशन का प्रयोग करना चाहिये, शरीर के किसी भी अंग में रक्‍त की सप्‍लाई न हो या कमी की वजह से वह अंग शिथिल पड गया हो तब हमे इसके पॉजेटिव डायलूशन का प्रयोग करना चाहिये । डी-2 :- ऐसेडिटी, खट्टी डकार, पाचन तंत्र के रोग, पेट का अल्‍सर, पेशाब में फासफेट, एल्‍बूमिन के निकलने पर इसके डी-2 डायलूशन के प्रयोग किये जाने के निर्दशन है । इसका प्रयोग गठिया के रोगों में अपनी सहायक औषधियों के साथ किया जा सकता है ।

डी-3:- इसका डी-3 डायलूशन रक्‍त संचार को कम करता है, रक्‍त स्‍त्रावों को रोकने, रक्‍त में क्‍लाट जमने पर इस डायलूशन का प्रयोग किया जाता है । यह रक्‍त में जमे क्‍लाट को धोल कर निकाल देता है, महिलाओं में मासिकधर्म के अत्‍याधिक रक्‍त स्‍त्रावों के होने पर या शरीर के किसी भी स्‍थान या अंग से जब अत्‍याधिक रक्‍त स्‍त्रोंव हो रहा हो तो इसके डी-3 डायलूशन का प्रयोग करना चाहिये ।

हायर डायलुशन या उच्‍च डायलूशन :- हायर डायलूशन का प्रयोग खूनी बबासीर, रक्‍त कैंसर ,मुंह , नॉक या शरीर के किसी भी अंतरिक अंग से रक्‍त बहने पर इस उच्‍च शक्ति के डायलूशन का प्रयोग करना चाहिये ।

                                                                                   डॉ0 सत्‍यम सिंह चन्‍देल

                                        बी0 एच0 एम0 एस0 , एम0 डी0 (ई0)

                                         जन जागरण चैरीटेबिल हॉस्पिटल

                                हीरो शो रूम के बाजू बाली गली नर्मदा बाई स्‍कूल

                                    बण्‍डा रोग मकरोनिया सागर म0प्र0

                                खुलने का समय 10-00 से 4-00 बजे तक

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