L ग्रुप रस एवं रक्त के बीच की औषधि है डॉ. आर.के.त्रिपाठी।

  लिंफैटिको  1

 L ग्रुप रस एवं रक्त के बीच की औषधि है ।


रस रक्त दोनों पर लिंफेटिको  को अपना प्रभाव रखती है 

यह औषधि लिम्फ की औषधि मानी गई है

लिंफैटिको लसिका ग्रंथियों , लसिका वाहिकाओं तथा लसिका की सर्वश्रेष्ठ औषधि है।

 अतः इसका  मुख्य प्रभाव लसिका के सफेद कणों पर है । रक्त जब तक तैयार नहीं हो जाता ,  

तब तक स्वेत लसिका परिवर्तन के काम आती है,  जब रक्त शुद्धीकरण या ऑक्सीकरण हेतु श्वसन तंत्र में पहुंचता है । तो रक्त की लाल कण विद्युत शक्ति को ऑक्सीजन से लेकर रक्त में शोषण करते हैं ।

इस पर भी लिंफेटिक को का प्रभाव है । अतः यह औषधि रस एवं रक्त प्रवाह के विद्युत ऊर्जा पर भी प्रभाव रखती है । लसिका का संचालन एवं संगठन को नियंत्रित करती है।

 चिकित्सा के दौरान लिंफेटिक चैनल हेतु तीन अशुद्धियां मानी जाती है।

 1 - स्करोफ्लोसो 

2 - लिंफेटिको 

3-  एन्ज़ियाटिको


क्योंकि लिंफेटिको का प्रभाव लिम्फ - रक्त पर पड़ता है । 

जबकि स्करोफ्लोसो का प्रभाव लिम्फ पर है । 

तथा एन्ज़ियाटिको का प्रभाव रक्त पर है । 


जबकि लिम्फाइटिको  का प्रभाव रक्त एवं रस दोनों पर पूर्ण रूप से है।

स्करोफ्लोसो  ग्रुप के औषधि का प्रभाव उन अंगों पर है । जो लसिका तैयार करते हैं ।   

 मेटाबोलिक के जो अंग लसिका को हृदय की ओर ले जाने वाली प्रणालियों में पहुंचाते हैं । इसका  कार्य उस समय शुरु होता है , जब भोजन मुंह में प्रवेश करता है ।

 और स्करोफ्लोसो का कार्य तब खत्म हो जाता है। जब लसिका बनकर तैयार हो जाती है ।

लिंफेटिको ग्रुप जब लसिका बनकर तैयार हो जाती है। 

रक्त में ऑक्सीजन का शोषण हो जाता है 

लसिका को वापस लाने वाली प्रणालियों और ग्रंथियों जो कि त्वचा के सूत्रों में पतली-पतली नलिका का जाल फैला हुआ है

शरीर में आपूर्ति के कारणों से उत्पन्न सभी लिंफेटिक रोग एवं लिंक ग्रंथियों एवं संचार की उत्तम औषधि लिम्फाइटिको  है।

एन्ज़ियाटिको :

रक्त के लाल कणों पर मुख्य प्रभाव रखती है। धमनियों के अंदर उपस्थित लाल कणो यानी आरबीसी पर अच्छा कार्य है।

लिम्फाइटिको का प्रभाव रक्त की बर्बादी के कारण रक्त की कमी,  लसिका की बर्बादी के कारण रक्त का पतला पड़ जाना, लसिका की कमी,ग्रंथियों में बतौड़ी , ग्रंथियों में प्रदाह  सूजन स्वेद ग्रंथियों की खराबी से खुजली,  त्वचा पर दाने , नाकड़ा , टांसिल की ग्रंथियों में सूजन, शैलेस्मिक कलाओं का पक जाना , रक्त की कमी से अकौता, कान बहना,  ग्रंथियों का बढ़ जाना,  फोड़ा फुंसी , मुंह की शैलेस्मिक कला एवं मांस का बढ़ना , छाती की पीड़ा दमा , सिर दर्द , मासिक धर्म की कमी , त्वचा से भूसी उतरना , त्वचा में कुछ रेंगता हुआ मालूम पड़ना , दांत का नासूर , नपुंसकता , घेंघा रोग गठिया , पागलपन के दौरे स्मरण शक्ति की निर्मलता बच्चों में नस का रोग मांस पेशियों की निर्बलता हाथ पैर के तलवों में जलन,  ज्यादा पसीना आना ,  प्रोस्टेट रस का बहना , दांत दर्द , सुजाक ,  मोटापा खून की कमी , खून का मवाद में मिल जाने इसके कारण खून का जहरीला हो जाना , मियादी ज्वर, प्रसूति  ज्वर , सेप्टिक ज्वर सड़े-गले घाव , गैंग्रीन अपेंडिसाइटिस , कारबंकल ,  मैनिंजाइटिस, इंसेफेलाइटिस , डिप्थीरिया विषैले कीड़े मकोड़ों का काटना , टीकाकरण के बाद उत्पन्न रोग , खुजली इंफ्लुएंजा नई सर्दी , पुरानी सर्दी ,  बार बार जुकाम खांसी सुख ने की वजह की वजह से बार-बार छींक आना , डायबिटीज ,औरतों में पेशाब की खराबी एवं बेचैनी,  हाथ एवं पैर का ठंडा रहना,  प्यास ना लगना , कमजोरी , पीलिया पेशाब में जलन , मांस पेशियों में खिंचाव , तनाव नाड़ी का धीमा चलना इस पर मेट्रो रिया , रक्तस्त्राव इत्यादि अनेकों रोगों में लिम्फाइटिको का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है।।

लिम्फाइटिको का प्रथम डालूशन ग्रंथियों के कार्य को बढ़ा देती है ।

अतः ग्रंथियों के नेगेटिव रोगों में दिया जाता है ।

जैसे : दस्त फोड़े , वायुशुल , शारीरिक निर्बलता मांस पेशियों की बाई ,  पसीना रुकने  की वजह से चर्म रोग , सूखी खुजली श्वेत रक्त की कमी ग्रंथियों में सूजन ट्रांसल आदि में प्रयोग किया जाता है।

तथा 

ग्रंथियों के बढ़े हुए कार्य को कम करने के लिए नेगेटिव सोच दिया जाता है।  जैसे प्रोस्टेट रस का बहना , बच्चों का लसिका रोग , ग्रंथियों में रक्त संचार एवं कड़ापन , जुडी बुखार सिरदर्द , मिर्गी , गर्भाशय में रक्त संचार , पागलपन का दौरा, मासिक धर्म की पीड़ा प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना,  त्वचा पर दाने , लसिका स्त्राव, कमर दर्द बतौली बाई प्रदाह , मधुमेह गठिया ,एडिशन डिजीज ब्राइट डिजीज ,पेशाब में एल्ब्यूमिन का आना, गुर्दा एवं अंडकोष का नासूर बाल गिरना इत्यादि रोगों में नेगेटिव डोज़ दिया जाता है।

विषैले जानवरों का काटना,  बाल झड़ने में प्रयोग किया जाता है 

आग एसिड से जल जाना एवं छिल जाने पर भी लिम्फाइटिको का प्रयोग किया जाता है।

कुल मिलाकर लिम्फाइटिको 

लसिका ग्रंथियों एवं लसीका वाहिकाओं तथा लसिका पर मुख्य प्रभाव रखने वाली प्रमुख इलेक्ट्रो होम्योपैथी औषधि है ।

यह हमें हमेशा याद रखना चाहिए 

कृपया सभी तक पहुचाएं।

डॉ. आर.के.त्रिपाठी

बलरामपुर

9935656181

drrktripathieh@gmail. com

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