कैंसोरोसो 17 डॉ. आर.के.त्रिपाठी
कैंसोरोसो 17
वनस्पतियों से उत्पत्ति हुई मूत्र तंत्र पर इस औषधि का विशेष प्रभाव
है
प्रत्येक आयु के स्त्री पुरुष एवं बच्चों में प्रयोग की जाने वाली
इलेक्ट्रो होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के सी 17 बहुत ही प्रभावकारी टिश्यू
मेडिसिन मानी जाती है । C17 औषधि सी.टी.वी के नाम से भी जानी जाती है। पीयूष ग्रंथि एड्रीनल
ग्रंथि एवं अग्नाशय आदि पर विशेष प्रभाव होने के कारण इन अंगों में या इससे संबंधित
रोगों को यह औषधि जड़ मूल से अस्थाई तौर पर समाप्त कर देती है।शरीर में रासायनिक
ऊर्जा का प्रमुख स्रोत कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन में जटिल मांड एवं शर्करा है ।जो पाचन के फलस्वरुप ग्लूकोज मैनोज़ एवं गलैक्टोज़
में विभाजित होकर रुधिर में अवशोषित हो जाता है । यह अवशोषित पदार्थ हिपेटिक पोर्टल द्वारा यकृत में पहुंचता है ।
यकृत कोशिकाएं
फ़ैक्टओज ,मैनोज़ एवं गलैक्टोज़ को रक्त से लेकर ग्लूकोज में बदल देती है । रक्त
में ग्लूकोज का संवहन प्रमुख रूप से होता है।कार्बोहाइड्रेट के पाचन से लेकर नियमन
तक उत्पन्न परेशानियां सी-17 के अंतर्गत आती है ।जब के कारण बस माण्ड एवं शर्करा का पाचन एवं
अवशोषण रक्त में नहीं हो पाता है ।तब इस औषधि का धनात्मक डोज़ अन्य सहायक औषधियों के साथ प्रयोग करना चाहिए। हिपेटिक पोर्टल बेन में उत्पन्न
खराबी के कारण रक्त की औषधि A3
के साथ सी-17 का प्रयोग करना चाहिए।
रुधिर में ग्लूकोज़ की मात्रा यकृत की कोशिकाओं के अनियंत्रित होने के फलस्वरुप
घटने बढ़ने पर या सहायक औषधियां के साथ से 17 का प्रयोग करना चाहिए।C17 का
आंशिक प्रभाव थायराइड ग्रंथि पर है ।इस ग्रंथि में उत्पन्न पैरा थर्मोन के स्राव
से या औषधि को नियंत्रित करती है ।जिसके फलस्वरुप पेशाब की मात्रा अधिक ,भूख
न लगना, प्यास अधिक लगना ,
कब्ज , सिर दर्द आदि को ठीक करती
है। पेशाब की पथरी बनने से रोकती है ।एक बार रोग ठीक होने के बाद दोबारा नहीं
होता। औषधि का अतिरिक्त प्रमुख प्रभाव एड्रिनल ग्रंथि पर है ।जिसका नियंत्रण पीयूष
ग्रंथि से होता है पियूष ग्रंथि ,
एड्रिनल ग्रंथि एवं हाइपो थैलमस का आपस में गहरा संबंध है इसके प्रमुख औषधि C17 है। एड्रीनल में स्त्राव की अनियमितताओं को यह औषधि अपने सहायक औषधियों के साथ नियंत्रित करती है
।जिससे रक्त दाब कम, रक्त में शर्करा की कमी , यकृत एवं मस्तिष्क की
पेशियों की शारीरिक कमजोरी
इत्यादि को ठीक कर देती
है।इस औषधि का एक स्थाई प्रभाव अग्नाशय नामक वाह्य स्त्रावी एवं अंतः स्त्रावी
ग्रंथि पर है। इसके अंतः स्त्रावी ग्रंथि से इंसुलिन एवं ग्लूकोन नामक हार्मोन
स्त्रावित होता है ।जो कि शरीर में कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिक का पूर्ण नियंत्रक है
शरीर की सारी कोशिकाओं के ग्लूकोज के लिए पारगम्यता को बढ़ा देती है। जिसके
फलस्वरुप कोशिकाएं रक्त से अधिक ग्लूकोज़ लेकर उपयोग करने लगती हैं । इंसुलिन के
अल्प स्त्रावण से शरीर की कोशिकाएं रक्त में संचरित ग्लूकोज़ को ले नहीं पाती है
।जिससे ग्लूकोस की अधिक मात्रा होने पर मूत्र के साथ उत्सर्जित
होने लगता है । जिसे मधुमेह कहते हैं।मधुमेह नामक बीमारी को दूर करने के लिए
इंसुलिन का स्त्रावण बढ़ाना होगा तथा रक्त में ग्लूकोज की मात्रा कम करनी होगी।
इसके लिए सी 17 का धनात्मक खुराक देना चाहिए । और साथ ही सहायक औषधियां भी देनी पड़ती है ।इस रोग में जब रोगी बेहोशी की
स्थिति में जाने लगे तो C17 के साथ S1 देने पर तत्काल लाभ मिलता है ।इसके विपरीत इंसुलिन के स्त्रावण से रुधिर
में ग्लूकोज की मात्रा कम होने लगती है ।तथा ग्लूकोन स्त्रावित होने लगता है ।
जिसके फलस्वरुप तंत्रिका कोशिकाओं में ग्लूकोस की आवश्यकता पूर्ति नहीं हो पाती
।तथा नेत्रों की रेटिना एवं जनन तंत्र की इपिथिलीयम ऊतक की कोशिकाओं में ऊर्जा
हेतु ग्लूकोस नहीं प्राप्त होता।जिससे मधुमेह नामक रोग खत्म हो जाता है । दृष्टि
ज्ञान एवं प्रजनन क्षमता कम हो जाती है मस्तिष्क कोशिकाओं में अत्यंत उत्तेजना के
साथ थकावट मोर्चा एवं होने लगता है ।जिसकी सर्वश्रेष्ठ दवा C 17 तथा S1 का नेगेटिव डोज़ है।पैंक्रियाज का बाहरी स्त्रावी ग्रंथि अनेकों पाचक
इज़ाइमो का स्त्रावण करती है ।ग्रंथि के अनियंत्रित तथा
असंतुलित हो जाने पर यह औषधि सामान्य स्थिति प्रदान करती है ।यह औषधि का पहला
प्रभाव मूत्राशय एवं मूत्र प्रणाली प्रभाव पर है।इस प्रकार यह औषधि दो माध्यमों से
कार्य करती है।पहला हार्मोन दूसरा तंत्रिका तंत्र औषधि के कार्य करने का प्रमुख
पहला माध्यम हार्मोन है ।तथा दूसरा एवं सहायक माध्यम
तंत्रिका तंत्र है । यह औषधि हार्मोन को संतुलित एवं नियंत्रित कर शरीर को संपूर्ण
स्वस्थ रखती है ।इन ग्रंथियों में से किसी भी प्रकार की परेशानियां यदि लिंफेटिक
चैनल से उत्पन्न हो रही हो, तो S ग्रुप की सहायक औषधि के साथ सी-17 के औषधी देनी चाहिए ।किसी
भी रोग को दूर करने के लिए कारण का निवारण अनिवार्य है ।वरना परेशानियां दूर हो
जाएंगे , परंतु पुनः रोग
वापस आ जाएगा ।ध्यान रहे आपका अनुभव औषधि का सही
चुनाव रोगी को राहत देगा । डायबिटीज (मधुमेह ) असाध्य रोग नहीं है , इसका
धैर्य से इलाज करें। डायबिटीज से उत्पन्न परेशानियां मात्र C 17 से एवं उसकी सहायक औषधियों से दूर हो की जा सकती हैं ।जिसका
नियमानुसार प्रयोग करना चाहिए C17
postive डोज़ अग्नाशय की निष्क्रियता, रक्त
एवं पेशाब में शर्करा का जाना ,
अग्नाशय के खराब होने से उत्पन्न परेशानियों को
दूर करती है। किडनी के हिस्सों में उत्पन्न खराबी को जड़ मूल से नष्ट कर देती है l
डॉ. आर.के.त्रिपाठी
बलरामपुर
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