एंजियाटिको -1

                  

                           एंजियाटिको -1

रक्‍त संचार में खराबी,या रूकावट की वजह से लो, या हाई ब्‍लड प्रेसर का होना ,ब्‍लड कम्‍पोजिशन की खराबी की वजह से यूरिया, कैटिनिन, कोलेस्‍टाईल का बनना ,हिद्रय का टॉनिक, रक्‍त क कमी को दूर करती, इसका प्रभाव आर्टरी पर है ।

                      एंजियाटिको -1

     एंजियाटिको-1 दवा का प्रभाव रक्‍त धमनियों ,एंव महाधमनी पर है , इसका प्रभाव शरीर के बाई तरफ होता है , धमनियों में शुद्ध रक्‍त बहता है तथा शरीर की समस्‍त धमनियों उनकी कोशिकाओं एंव तन्‍तुओं पर प्रभाव रखने के कारण छोटी छोटी कोशिकाओ एंव तन्‍तुओं तक रक्‍त पूर्ति करती है, इससे कोशिकाओं को उनका भोजन तथा आक्‍सीजन की सप्‍लाई नियमति बनी रहती है, एंव कोशिकाओं को उर्जा मिलती रहती है पुरानी कोशिकाऐ नष्‍ट होती रहती है तथा नई कोशिकाये बनती रहती है । एंजियाटिको -1 जहॉ कही रक्‍त संचालन में आई रूकावट की वजह से उक्‍त अंगों तक रक्‍त सप्‍लाई नही हो पाती वहॉ के सेल्‍स तथा टिशू डेमेज होने लगते है वहॉ पर विजातीय तत्‍वों के जमा होने से वहॉ पर गाठों का निमार्ण होने लगता है, उक्‍त स्‍थानो पर सूजन आ जाती है । छोटी छोटी कोशिकाओं तक रक्‍त की पूर्ति न होने से उक्‍त स्‍थान के सेल्‍स को भोजन व आक्‍शीजन के न मिलने से सेल्‍स तेजी से नष्‍ट होने लगते है, सेल्‍स के नष्‍ट होने से उस स्‍थान या सम्‍बन्धित अंग पर मृत सेल्‍स जिसका शरीर से बाहर निकल जाना अति आवश्‍यक है अन्‍यथा मृत कोशिकाऐ जो शरीर के लिये फारेन बाडी (विजातीय तत्‍व) है यदि वह शरीर से बाहर नही निकल पाती तो उस स्‍थान में सूजन गाठे फोडा जो आगे चल कर कैंसर जैसी घातक बीमारी बन सकती है यह सभी ब्‍लड सकूलेशन की वजह से होता है । ब्‍लड सरकूलेशन की वहज से शरीर का कोई भी अंग ठीक से कार्य न कर रहा हो, हाथ पैर ठंडे पड जाते हो, रक्‍त की कमी हो , आदि समस्‍याओं पर इस दवा का प्रयोग करना चाहिये ।  

जब कोई ब्‍लाकेज आ जाती है तो हिद्रय को अधिक कार्य करना पडता है यह दवा ब्‍लड र्सकुलेशन में अच्‍छा कार्य करती है । सभी प्रकार की बीमारीयॉ  लगभग ब्‍लड या लिम्‍फ में आई खराबी की बजह से होती है ।

ब्‍लड के कम्‍पोजिशन में आई खराबी की वजह से यूरिया, कैटीनिन, कोलेस्‍टाल आदि बनने पर यह दवा अच्‍छा कार्य करती । ब्‍लड प्रेसर का लो या हाई होने पर भी यह दवा अच्‍छा कार्य करती है परन्‍तु इस स्थिति में इसका प्रयोग डायलूशन के प्रयोग पर निर्भर करता है , जैसे लो ब्‍लड प्रेशर मे ए-1 की सूखी गोलियों का प्रयोग करना चाहिये । ब्‍लड र्सकुलेशन का उचित तरीके से कार्य न करने पर शरीर के कई प्रमुख अंग जैसे लीवर, स्‍प्‍लीन ,पेनक्रियाज, किडनी, ऑते, ब्रेन ,हिद्रय आदि प्रभावित होते है  । एंजियाटिको -1 रक्‍त को शुद्ध करते हुऐ रक्‍त संचार को ठीक करती है , यह दवा त्‍वचा रोगो में भी अपनी सहायक औषधियों के साथ अच्‍छा कार्य करती है ,साथ ही किसी भी तरह की सूजन के लिये बहुत ही उपयोगी दवा है । रक्‍त संचार ठीक से कार्य न करने के कारण जो भी रोग उत्‍पन्‍न होते है  उसमें यह दवा उपयोगी है । शरीर के किसी भी स्‍थान से रक्‍त स्‍त्रावों का होना जैसे नकसीर , बबासीर या फिर महिलाओं के माहवारी के समय होने वाले रक्‍त स्‍त्राव में यह दवा अपनी सहायक औषधियों के साथ अच्‍छा कार्य करती है । ब्‍लड सकुलेशन की बजह से खूनी या बादी बबासीर आदि में खूनी बबासीर में बी ई के साथ देना चाहिये ।

मस्तिष्‍क :-  रक्‍त संचार के ठीक से कार्य न करने की वजह से मस्तिष्‍क में रक्‍त का अधिक होना, जिससे कानों में भनभनाहट की आवाज आना, चहरा तमतमाया हुआ ऑखों के सामने तिरकिरे सा उडना , मस्तिष्‍क में धीमा धीमा र्दद बने रहना,ऑखों मे रक्‍त जमना ,इस दवा के हल्‍के डायल्‍यूशन के प्रयोग से मस्तिष्‍क की रक्‍त प्रणालियों सुकोडकर रक्‍त को वहॉ से अलग कर देती । चिडचिडापन ,पागलपन ,मिर्गी, आधेधड का लकवा, तथा मानसिक रोग, दिमाकी परेशानीयॉ, माईग्रेन, आदि में यह दवा अपनी सहायक औषधियों के साथ अच्‍छा कार्य करती है ।

किडनी, मूत्र वाहक संस्‍थानों में रक्‍त कम पहुंचने के कारण जो रोग होते है उसको यह ठीक करती है । इसका कार्य उन अंगों पर भी है जो रक्‍त शुद्धि सम्‍बंधी कार्य करते है जैसे लंग ,लीवर आदि

प्रदाह:- रक्‍त संचालन का ठीक से कार्य न करने के कारण शरीर के कई आंतरिक अंगो में प्रदाह होने लगता है जैसे हिद्रय, फेफडे, यकृत, मूत्राश्‍य, मूत्रनली, तथा तालू की ग्रथियों में सूजन

महिलाओं की बीमारी:- जैसा कि हमने पहले भी बतलाया है कि रक्‍तस्‍त्रावों के होने पर इस दवा का प्रयोग अपनी सहायक औषधि ब्‍लू इलैक्‍टीसिटी के साथ प्रयोग करने पर रक्‍त स्‍त्रावों को रोका व नियमित जा सकता है ।

महिलाओं की बीमारी जैसे माहवारी का अधिक होना या कम होना इस पीरियड में कमर या पेट मे र्दद कमजोरी तबियत खराब होने काला रक्‍त, गाठे नुमा रक्‍त गाढा खून जैसी स्थिति में  ए-1 दवा को इसकी सहायक औषधि सी-1 के साथ प्रयोग करना चाहिये अधिक रक्‍त स्‍त्राव होने पर इसके साथ बी ई का भी प्रयोग करना चाहिये ।

इतना ही नही यह दवा रक्‍त की कमी को दूर करती, तथा यह हिद्रय को मजबूत बनाती है इसे हिद्रय का टॉनिक भी कह सकते है, हार्ड टॉनिक के रूप में इसका सेकेन्‍ड डायलूशन का प्रयोग करना चाहिये । यह रक्‍त शोधक अर्थात रक्‍त को शुद्ध करने बाली दवा है, हिद्रय निर्बलता में उपयोगी दवा है   

दमा जिसमें रक्‍त संचय हो इस दवा का प्रयोग पी ग्रुप की दवा के साथ करने से बहुत अच्‍छे परिणाम मिलते है ।

यह सभी तरह के बुखर चिकिनगुनिया , पुराना बुखार ,टाईफाईड, बायरल फीवर,  किसी भी तरह के बुखार में ए-1 को एफ-1 के साथ प्रयोग करने पर आशातीत प्ररिणाम मिलते है ।

फोडों में एस-1 सी-1 के साथ प्रयोग करना चाहिये ।

फेफडों के रोग में पी-1 के साथ इसका प्रयोग करने पर उचित परिणाम मिलते है ।

इस दवा का प्रथम डायलूशन रक्‍त संचालन को तेज करता है ।

इसका दूसरा डायल्‍यूशन रक्‍त संचालन को कम करता है , इसलिये इसका प्रयोग रक्‍त के प्रवाह को बन्‍द करने में किया जाता है ।

इसका तृतिय डायल्‍यूशन तीब्र ज्‍वर ,वात रोग हिस्‍टीरिया में करना चाहिये ।

ब्‍लड सकूलेशन में ए-1 का प्रयोग करना चाहिये । हाहई बी पी में ए-1 का 3 डायलूशन का प्रयोग करना चाहिये , हायर डायलूशन से ब्रेन हेमरेज या ब्रेन में जमे थक्‍के को ठीक किया जा सकता है ।              

 किसी भी प्रकार की बीमारीयों के लिये हमारे फोन नम्‍बर पर फोन कर उपचार व दवाये मंगाई जा सकती है ।  मो0 9300071924, 9630309033

डॉ0 सत्‍यम सिंह चन्‍देल

  बी0एच0एम0एस ,एम0डी0ई0

जन जागरण चैरीटेबिल हास्‍पिटल

बजाज शो रूम के सामने नर्मदा बाई स्‍कूल

बण्‍डा रोड मकरोनिया सागर मध्‍य प्रदेश

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